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मैं रथ पर क्यों नहीं सवार हो सकता ?

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पहले के जमाने में राजा- महाराजा रथ की सवारी करते थे। संभ्रांत लोगों की भी सवारी का मुख्य साधन रथ था। आज के राजा-महाराजा भी उस षाही परम्परा को कायम रखे हुएं हैं। और सदा नही तो कभी-कभी रथ पर सवार होकर अपनी षौक पूरा कर हीं ले रहे हैं। जब साधु-सन्यासी तक रथ पर सवारी का मोह त्याग नहीं पा रहे हैं तो मैं तो ठहरा सांसारिक व्यक्ति। मेरे अंदर भी रथ पर सवार होने की तीव्र इच्छा है। हवाई जहाज पर सवार होते-होते मन भर गया है। उसमें वैसा आकड्र्ढण नहीं रहा। क्योंकि विषाल जन समूह का ध्यान खीचने में असमर्थ वह रहा है। आदमी फुर्र सा यहां से वहां पहुंच जाता है और लोग जान हीं नहीं पाते। टिकट दिखाना पड़ता है।

लेकिन मेरे रथ पे सवार होने की बात से कुछ लोगों को कुछ-कुछ होने लगा है। उन लोगों कहना है कि रथ पर सवार होने के लिए मेरे पास पात्रता नहीं है। इसपर मेरा कहना है कि क्या और लोग जो रथ पर सवार हो रहे हैं वो आपको सर्टीफिकेट दिखा रहे हैं। जो आप मुझसे आषा रखते हैं। ऐसा नहीं कि केवल मेरा हीं रथ निकल रहा हो। सौ-पचास रथ में मेरा रथ भी निकल जाएगा तो कौन सा आसमान टूट पड़ेगा।

आखिर बाप-दादा ने किस लिए जमीन-जायदाद छोड़ी है। मेरे सुख के लिए हीं न। मेरा सुख रथ पर सवार होने में है। मैंने जायज-नाजायज तरीके से धन किस लिए कमाया है। अपने सुख के लिए हीं न।

आखिर मेेरे पास किस चीज की कमी है कि मैं रथ पर सवार नहीं हो सकता। मेरे पास धन है दौलत है । नौकर है चाकर है। मैं भी लोगों को सभा स्थल पर लाने के लिए गाडि़यों की व्यवस्था करवा सकता हूं। मेरी राजनीतिक योजना पाइप लाईन में हीं सही लेकिन है। मेरे पास भी चेले- चमचे हैं। मैं भी लोगों को पकवान खिला सकता हूं। मैं भी नोट बंटवा सकता हूं। अगर लोगों के पास समाज को कुछ देने के लिए है तो मेरे पास भी है। मेरा भी जीवन लोगों के भाग्योदय पर गहरा रिसर्च करने में बीता है। मेरे बताए रास्ते पर चलकर भी लोग रातो-रात अपना किस्मत चमका सकते हैं। मेरा भी रथ लोगों के जीवन में रंग लाएगा तरंग लाएगा। बेरोजगारों को रोजगार दिलाएगा। कई कार्यकर्ताओं का किस्मत चमकाएगा। उन्हें भीड़ जुटाने का अवसर दिलाएगा।

मैं भी आरक्षण का हिमायती हूं। मैं भी इसे जातिगत एवं वर्गगत आधार पर लागू करना चाहता हूं। क्योंकि आर्थिक आधार पर लागू करने से सही लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। मेरे पास भी भ्रष्टाचार मिटाने के फाॅर्मूले हैं। पाकिस्तान को ठीकाने लगाने के मंसूबे हैं।

मैं भी अच्छा वक्ता हूं। मैं भी विद्वता दिखाऊंगा। जनता को रिझाउंगा। हास्य-विनोद से लोगों को गुदगुदाऊंगा। वादों की डोज पिलाऊंगा। कम से कम महीने दिन रोज पिलाऊंगा। कल्पना लोक की सैर कराऊंगा।

आखिर सब अपनी मन की हसरत पूरी कर रहे हैं। तो मैं क्यों नहीं कर सकता। सब अपने मन का भड़ास निकालकर स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकता। मेरे भी रथयात्रा के दूरगामी परिणाम होने जा रहा है। मेरी रथयात्रा भी इतिहास बनने जा रही है। मेरे रथ को कोई रोककर इतिहास रच सकता है।



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rudrapunj के द्वारा
November 12, 2011

तिवारी जी जागरण JUCTION में आप का स्वागत है रुद्रनाथ त्रिपाठी वाराणसी

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 11, 2011

प्रिय गोपाल जी ….आदाब ! पहली -२ बार किसी की पहली ही पोस्ट पर ऐसी ताजगी से रूबरू हुआ हूँ ….. वैसे मेरी माने तो आप अगर कुंवारे है तो घोड़ी पर सवार होकर उस पर जुल्म करने की बजाय रथ पे सवार होकर अपनी होने वाली शरीके हयात को ब्याहने जाए ….. आपका ख्वाब तो पूरा होगा ही + आप सभी बरातियों और घरातियों तथा दूसरे तमाम लोगों का ध्यान आपनी और खींचने में कामयाब होंगे ….. और आपकी वधू भी छत पर चढ़ कर चीख -२ कर गायेगी “मेरा राजकुमार (गोपाल ) आया रथ पर सवार हो के” ***************************************************************** एक बेहद अच्छे लेख पर मेरी तरफ से भी मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/11/राजकमल-इन-पञ्चकोटि-महामण/

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 11, 2011

    भ्राता राजकमल जी……. आपके संरक्षण मे ये भी व्यंग के मैदान मे शतकों की बरसात करें….. और यहाँ के पाठकों का मनोरंजन हो…. ये शुभकामनायें इनके लिए हैं……….

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 11, 2011

अच्छा व्यंग… इस मंच पर आपको कई उत्कृष्ट व्यंगकारों से दो चार होने का मौका मिलेगा…… जो निश्चित ही आपकी प्रतिभा को निखारने मे आपकी सहायता कर सकते है…. पहले लेख के लिए बधाई…. इस मंच पर आपका स्वागत है………

shashibhushan1959 के द्वारा
November 11, 2011

बढ़िया है तिवारी जी, अब आप ही बाकी थे. आप भी आजमायें. अच्छी रचना.


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