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क्या भगत सिंह जेल नहीं गये थे ?

Posted On: 12 Nov, 2011 Others में

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हेलो डैड

हाय

आज मुझे भी महान विभूतियों की तरह से जेल से आपको पत्र लिखने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। आषा है आप मुझपर गौरवान्वित होंगे। पापा ये ऐतिहासक छड़ विरले को मिलता है। जैसा कि पं जवाहर लाल को मिला था। जब उन्होंने अपनी पुत्री को जेल से पत्र लिखा था। लेकिन पापा मैं भूल गया था कि आप पूराने जमाने के व्यक्ति हैं। आपको मेरे जेल जाने से सुख की जगह दुख भी हो सकता है। लेकिन पापा अगर आप अपने दिमाग पर जोर डालें ंतो आपको मालूम होगा जेल जाना षर्म की नहीं गर्व की बात है। क्या भगत सिंह जेल नहीं गये थे। क्या महात्मा गांधी जेल नहीं गये थे। क्या आज के गांधी अन्ना जेल नहीं गये थे। आपने अन्ना के कथन सुना होगा कि जेल तो वीरों का भूषण है। फिर क्यों रो धोकर मुझे आप खरदूड्ढण बनाने पर तुले हुए हैं। क्यों आप अपने बेटे के महत्व को कम करके आंक रहे हैं। क्या आप अपने बेटे से प्यार नहीं करते। आप कहेंगे कि वे सब महान उद्देष्य के लिए जेल गये थे न कि अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए। लेकिन पापा आज मैं हीं नहीं केवल भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद हूं। आज मेरे जैसे अनेक लोग हैं जो भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं लेकिन उनके परिवार के लोग आप जैसा पष्चाताप नहीं कर हैं। बल्कि जेल में उन्हें मलपूआ पहंुचा रहे हैं। लेकिन मैं इस दृष्किोण से अभाग हूं। मैं अपने पिता के आदर्ष की बली बेदी पर चढ़ चुका हूं।

मैने आपसे कहा था कि डैड वनडे मेक यू प्राऊड। बट इसके लिए आपको अपना एटीटृयूड बदलना होगा। 21वी सदी के अनुसार अपने को ढालना होगा। बात-बात पर संस्कार एवं कल्चर की दुहाई देनी बंद करनी होगी। थोड़ा अपने आपको को अपडेट करना होगा। मैं नहीं चाहता कि आपके चलते दोस्तों में मेरी नाक कट जाए। आपको मेरे दोस्त दकियानसू विचारों वाला समझें। पापा आखिर आप क्यों नहीं समझते हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। पाड्ढण युग में नहीं। इस युग में कल्चर का कोई महत्व नहीं।

आपको समय के साथ बदलना होगा। धोती कुर्ता की जगह सूटेड-बूटेड होना पड़ेगा। आपके समय में लोग धोती कुर्ता पहनते थे। इसका यह अर्थ नहीं कि आप आज भी पहने। क्योंकि हमारे पूर्वज तो नंगे रहते थे तो क्या हमें भी नंगा रहना चाहिए। डैडी मैं समझता हूं कि इसमें आपकी कोई गलती नहीं बल्कि दादाजी ने आपको गलत संस्कार हीं दिया था। वर्ना आप भी आज मार्डन होते। लेकिन आप कर हीं क्या सकते थे। उस जमाने में आप पिता की इच्छाओं का अनादर भी तो नहीं कर सकते थे । आज की तरह आपके समय में लोगों की स्वतंत्रता थोड़े थी। यहीं कारण है कि आप थोड़ा कुंठित हो गये हैं। इसलिए आपमें आत्म विष्वास थोड़ा कम है। पर घबड़ाने की बात नहीं मैं आपको पर्सनालटी डेवलपमेंट की कोर्स करावा दूंगा। सुना है कि आप अन्ना हजारे के आंदोलन से काफी उत्साहित हैं। लेकिन अन्ना हजारे के आंदोलन से आपको ज्यादा उत्साहित होने की आवष्यकता नहीं । क्योंकि क्या आप समझते हैं लोगों के बदले बिना भ्रष्टाचार समाप्त हो जायेगा।

पापा आप तो अपना जीवन जी लिए हो लेकिन अपनी षर्तें थोपकर मेरे जीवन में जहर तो मत घोलो। अब आपको मेरे अनुसार जीना होगा।

पापा आपको मेरे झूठ बोलने पर आपत्ति है। लेकिन मैंने झूठ बोलना किससे सीखा। इसी समाज से सीखा। उन लोगों सेीखा जो आज समाज का नेतृत्व कर रहे हैं। पापा आप क्यों नहीं समझते कि आज महात्मा गांधी नहीं हैं लोग उनको भूला चुके हैं। लोग उनके आदर्षों का इस्तेमाल आज अपने निजी लाभ के लिए कर रहे हैं। कारण कि कहने को तो सभी लोग उनके आदर्षों पर चलते हैं लेकिन तब भी इस देष में भ्रष्टाचार खूब फलता-फूलता है। पापा क्या आज सत्यवादी देष में भूखा नहीं मर रहा है। क्या आप सत्यवादी बनाकर मुझे भूखा मारना चाहते हैं। आखिर आप क्यों नहीं समझते कि आज झूठ बिकता है। सत्य दर-दर की ठोकर खाता है। आषा है आप मेरी बात समझ गए होंगे। देर सबेर आप मेरे बिचार समझ हीं जाते हैं या आपको समझना पड़ता है। मां कहती है कि आप मुझे अपने जान सेे ज्यादा प्यार करते हैं। इसका आपको प्रमाण देना होगा । मैं ऐसे नहीं मानूंगा। इसके लिए आपको अपने आदर्षों को पूत्र मोह के भेंट चढ़ाना होगा। आपको मुझे जमाने के साथ तरक्की करने देना होगा। जैसा कि और लोग तरक्की कर रहे हैं।

अन्त में आपका बेटा- बड़बोलनगुरू।



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 13, 2011

नमस्कार ! शुक्रिया ! स्वागत ! आदर ! अभिनन्दन ! और आभार ! “ऐ..राजा! राईट एन लैटर टू हिज फादर करुणानिधि” लेकिन भाई साहिब उसकी बहना भी तो उसके साथ ही उसका हौंसला बढ़ा रही है +अकेलापन दूर कर रही है …. सुंदर रचना , आप इस मंच पर एक दिन छा कर धमाको का सिलसिलेवार विस्फोट करने की क्षमता रखते है ….. प्रतिकिर्या का उत्तर देने की कोशिश भी किया कीजिये -इतना शर्माना भी ठीक नहीं ….. हा हा हा हा हा मुबारकबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/11/राजकमल-इन-पञ्चकोटि-महामण/

shashibhushan1959 के द्वारा
November 13, 2011

मान्यवर तिवारी जी , सादर. आप वाकई अपने पुराने विचारों वाले पिता के नए पुत्र लगते हैं. तभी तो भरी जवानी में ही जेल का आनंद उठा रहे हैं. ऐसी तरक्की हर ऐरे-गैरे को कहाँ नसीब है. यह लेख कहाँ से लिख रहे हैं, घर से या डाइरेक्ट जेल से. लाजवाब व्यंग्य रचना. बधाई.


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