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आश्वासन गुरू

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वह नेता कैसा जो आश्वासन देना न जानता हो। जिसको आश्वासन देने में महारत हासिल नहीं वह जीवन में कभी नेता नहीं बन सकता। जो नेता जीवन में जितना अधिक आश्वासन देगा उसकी नेतागिरी उतनी अधिक चमकेगी। और जो आश्वासन देने में कंजूसी करेगा वह जीवन भर रोड़छाप नेता रह जाएगा।
अभी तो आश्वासन का कोई कोर्स नहीं है लेकिन आश्वासन के बढ़ते महत्व को देखते हुए, आशा है कई संस्थान इसमें डिग्री या डिप्लोमा शुरू कर देंगे। जब तक शुरू नहीं हुआ है तबतक नेताओं के यहां इसकी प्रैक्टिकल ट्रªेनिंग ली जा सकती है।ं
ऐसा नहीं कि आश्वासन केवल नेताओं के लिए आवश्यक है आश्वासन हर कोई दे सकता है। । वैसे तो आश्वासन जीवन का अंग है कारण कि यह लोक व्यवहार के लिए आवश्यक है। इसे कुछ उदाहरण के द्वारा समझा जा सकता है। मान लीजिए, आपकी बीवी का आप से कुछ डिमांड हो और आप उसको तत्काल पूरा करने में असमर्थ हैं। ऐसे में सिर्फ आश्वासन हीं आपको बीवी के कोप से बचा सकता है। आश्वासन का डोज बढ़ाते जाइए, बीवी खुश रहेगी। ठीक इसी तरह अगर आपके बोस ने आपको कोई काम दिया है और आप उसको तत्काल करने में असमर्थ हैं तो आश्वासन की घुट्टी पिलाते जाइए, बोस होस में रहेगा।

अब आइए हम बकवास छोड़कर कुछ काम की बात करते हैं हम बात कर रहे थे अपने क्षेत्र के नेताजी की जिनकी पहचान चेहरे पर मुस्कान और मीठी जुबान है। जब उनके दिल में देश प्रेम की भावना हिलोडे़ मारने लगी तो वे नेतागिरी के क्षेत्र में कूद पड़े। और दो-चार की बली लेने के बाद माननीय बन बैठे। उनका मानना है कि नेता बने बिना देश की सेवा नहीं जा सकती हैं। उनके आदर्ष सुखरामजी और कलमाडीजी हैं और लक्ष्य उन्हीं की तरह तिहाड़ की यात्रा करना है।

नेता बनने की हसरत पूरा होने के बाद उनमें रोलमाॅडल बनने की इच्छा बलवती हुई। जब कभी रोलमाॅडल बनने की बात चलती उनका मन कचोटने लगता। उनको लगता कि बिना रोलमाॅडल बने तो जीवन हीं व्यर्थ है। गहरे रिसर्च के बाद उन्होंने उस क्षेत्र को खोज निकाला जिसमंे वह रोलमाॅडल बन सकते थे। उन्होंने इतिहास को खंगाला एवं पाया कि ईमानदारी जैसे जैसे क्षेत्र में कई महारथी मौजूद हैं। इसलिए इस क्षेत्र में तोें वे रोलमाॅडल बनने से रहे। आत्मविश्लेषण के बाद उन्हानेें पाया कि आश्वसन देने की क्षमता उनमें कूट-कूट कर भरी हुई है। और इस क्षेत्र में वह किसी को भी अपने अपने आगे टिकने नहीं देंगे। आइए, अब हम उनके प्रमुख आश्वासन के बारे में बात करते हैं।

अबतक उनके सुपरहिट आश्वासन है। रामराज्य ला दूंगा, बेरोजगारी दूर भगा दूंगा, गरीबी को मिटो दूंगा और सारे क्वारों की शादी दूंगा आदि।
नेताजी की लोकप्रियता का आलम यह है कि उनसे बालक और वृद्ध सभी खुश हैं। बच्चे तो आपको गलि-मुहल्ले में नेताजी अमर रहें का नारे लगाते हुए मिल जाएंगे। उनके लोकप्रियता का कारण यह है कि उन्होंने किसी काम भले न कराया हो लेकिन आश्वासन के लिए कभी नहीं रूलाया।
जनता अपने आश्वासन सम्राट को पर्याप्त प्यार करती है। और उनके आश्वासन प्रतिभा को निखारना चाहती है। इसलिए इस बार चुनाव जिताने की जगह उन्हें हरा दी है। जनता का मानना है कि आश्वासनगुरू ओवर काॅनफिडेन्स का शिकार हो सकते हैं और उनके आश्वासन क्षमता में कमी आ सकती है। इसलिए उनका चुनाव हारना जरूरी है। जिस प्रकार एक क्रिकेट खिलाड़ी खराब प्रदर्शन के बाद और अधिक मेहनत करने लगता है। ठीक उसी प्रकार एक नेता चुनाव हारने के बाद और अधिक आश्वासन देने लगता है। जनता को आश्वासन अच्छा लगता है क्योंकि वास्तविक जीवन में न सही कल्पनालोक में तो वह सब मिल जाता है जो उन्हें मिलना चाहिये था। अगर वो भी उन्हें नहीं मिलेगा तो उनके जीवन में बचेगा हीं क्या।



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manojjohny के द्वारा
November 20, 2011

आपका ब्यंग बहुत उम्दा है, यह आश्वासन नहीं हकीकत है।


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