हास्य- व्यंग्य के विविध रंग

Just another weblog

32 Posts

50 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 7389 postid : 79

लोकपाल बकवास है।

Posted On: 14 Dec, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

देष अपना है
सरकार अपनी है
नेता अपने हैं
भ्रष्ट्राचार सपना
कोरी कल्पना है
लोकपाल बकवास है
इसे लागू करना
लोकतंत्र का उपहास है
अज्ञानजनित द्वन्द है
हर कोई स्वच्छन्द है।
नेताओं की मौज है
बेरोजगारों की फौज है
पैसा भगवान है।
बिक रहा ईमान है।
कुतों का मान है
गया-गुजरा इनसान है
फलफूल रहा जयचंद्र हैं।
चैहान के लिए दरवाजे सारे बन्द है
इंडिया खूब षायनींग कर रहा है
चन्द लोगों की तिजोरियां भर रहा है
पर भारत कंगाल है।
जनता लाचार है
देष की आत्मा गावों में बसती है मगर
बस वहां भूख का साम्राज्य है।
बिचौलियों का राज्य है।
पाक के साथ षिष्ट्राचार है।
कसाब बना मेहमान है।



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shashibhushan1959 के द्वारा
December 14, 2011

बहुत अच्छा व्यंग्य ! बधाई !

krishnashri के द्वारा
December 14, 2011

मान्यवर , पढ़ते ही मुंह से निकला , ” बहुत खूब ” , ” बहुत सुन्दर ” .


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran